जब गाय प्लास्टिक बैग खाती है|

"गाय उन्नति और धन धान्य का स्रोत हैं" - महात्मा गांधी

किसी राजनैतिक या निज के उद्देश्य केलिए गाय का महत्त्व नहीं लिखा जा रहा है। एक भरतीय नागरिक होने के नाते मैं बहुत अचंभित हूं, जहाँ गाय को भगवान का प्रतीक माना जाता है वहाँ हज़ारों गायें प्लास्टिक से मरती हैं। गाय के पेट की अंदुरुनी संरचना को समझना हम सब के लिए बहुत ज़रूरी है। जहाँ प्लास्टिक खाने से कैसे गाय दर्दनाक मौत मारती है।

गाय 'रुमिनान्त' (Ruminants) है, मतलब गाय वो स्तनधारी है जो अपना खाना पेट में रखती हैं और ख़ाली समय में खाना वापस मुँह में ले आती हैं और चबाने लगती हैं। इसे जुगाली कहते हैं।गाय, हिरण, भेड़ इन सब का मुँह हर समय चलता रहता है। यह एक दिलचस्प बात है, जहाँ मनुष्य के एक पेट होता हैं वहाँ गाय के चार पेट होते हैं|


जब गाय प्लास्टिक खाती हैं तो प्लास्टिक पेट में जम जाता है और एक समय ऎसा आता है कि प्लास्टिक के कारण गाय का पेट जाम हो जाता है। गाय का पेट जाम होना एक बहुत ख़तरनाक चीज़ है। प्लास्टिक के कारण गाय को अपना पेट भरा भरा महसूस होता है इसलिए गाय घास या दूसरी चीज खाना छोड़ देती है।गाय के पेट में एक बैक्टेरिया रहता है जो गाय के खाने को पचाने में मदद करता है और वह बेक्टेरिया गैस भी उत्पन्ना करता है। पेट की गतिविधि के कारण गैस बाहर निकल जाती है ,लेकिन पेट जाम होने के कारण पेट में गतिविधि नहीं होती और गैस पेट में ही जमा हो जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि गाय का पेट बुरी तरह से फुल जाता है और गाय की दर्दनाक मौत हो जाती है।


क्या यह हम लोगों का दोगलापन नहीं है? जिस गाय को भगवान समझ कर पूजते हैं उसीकी मौत का कारन हम बनते हैं। प्लास्टिक तो एक सामाजिक समस्या है ही, किन्तु जिस प्लास्टिक को खा कर गाय हमें दूध देती है, वो किसी ज़हर से कम नहीं है। दूध जिसे 'संतुलित आहार' का दर्जा दिया गया है, जिसे बच्चे, बूढ़े, जवान, रोज़मर्रा मे पीते हैं। वैसे भी एक बीमार गाय से क्या ही आशा की जा सकती है।


मैं किसी को प्लास्टिक इस्तेमाल के लिए रोक नहीं सकता क्योंकी किसी एक आदमी या संस्था के द्वारा स्वभाव को बदलना बहुत मुश्किल है लेकिन प्लास्टिक को लेकर हम अपना नज़रिया बदल सकते हैं। यह एक धीमा जहर है इसको इधर उधर न फेंके, जागरुक बने।


हिंदी रूपांतरण - राज लक्ष्मी मूंधड़ा

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